बिटकॉइन का “हार्ड एसेट” नैरेटिव क्यों कमजोर पड़ रहा है?


 वित्तीय बाज़ार को केवल चार्ट, कैंडल और आँकड़ों के ज़रिये समझना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। असल में बाज़ार निवेशकों की सोच, भरोसे और बाज़ार में चल रही कहानियों (मार्केट नैरेटिव्स) से चलता है। जब तक निवेशक किसी कहानी पर भरोसा करते हैं, पैसा उसी दिशा में जाता रहता है। लेकिन जैसे ही उस कहानी पर सवाल उठने लगते हैं, उसी वक्त उस एसेट की चाल भी बदलने लगती है।

पिछले कुछ महीनों में ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला। चाँदी की कीमतों में ज़बरदस्त उछाल आया और वह रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच गई, जबकि बिटकॉइन उसी समय एक सीमित दायरे में फँसा रहा यह फर्क सिर्फ़ कीमतों का नहीं है, बल्कि यह साफ़ दिखाता है कि इस समय निवेशक किस एसेट को ज़्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद मान रहे हैं

यही वजह है कि आज एक बार फिर बिटकॉइन केडिजिटल गोल्डऔरहार्ड एसेटहोने के दावे पर सवाल उठने लगे हैं, और बाज़ार में इस बात पर गंभीर चर्चा हो रही है कि क्या बिटकॉइन वाकई संकट के समय सुरक्षित निवेश साबित हो पा रहा है या नहीं।

हार्ड एसेट की अवधारणा और बाज़ार की सोच

हार्ड एसेट उसे कहा जाता है जो समय के साथ अपनी वास्तविक कीमत और क्रय-शक्ति को बनाए रख सके। यानी ऐसी संपत्ति, जिसमें निवेश करने के बाद लोगों को यह भरोसा रहे कि भविष्य में भी उसकी वैल्यू पूरी तरह खत्म नहीं होगी।

आमतौर पर बाज़ार किसी भी एसेट को हार्ड एसेट तभी मानता है, जब उसमें कुछ खास गुण मौजूद हों। सबसे पहले, वह संपत्ति ठोस हो या कम से कम इतनी विश्वसनीय हो कि लोग उसे ठोस संपत्ति के बराबर मानें दूसरा, उसकी आपूर्ति सीमित हो, ताकि जरूरत पड़ने पर उसे मनचाहे तरीके से बढ़ाया जा सके। तीसरा और सबसे अहम गुण यह होता है कि मंदी, महँगाई (inflation) या मुद्रा की कीमत गिरने के समय भी उसका मूल्य पूरी तरह टूटे

इसी वजह से इतिहास में सोना और चाँदी को सबसे भरोसेमंद हार्ड एसेट माना जाता रहा है। जब भी आर्थिक संकट आया, निवेशकों ने इन्हीं धातुओं की ओर रुख किया। यही कारण है कि बाद में बिटकॉइन को भीडिजिटल गोल्डकहा जाने लगा। इसकी सीमित सप्लाई, विकेंद्रीकृत सिस्टम और सरकारी नियंत्रण से बाहर होनाइन सब बातों ने बिटकॉइन को एक संभावित हार्ड एसेट और सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में पेश किया।

लेकिन बाज़ार सिर्फ़ दावों और सिद्धांतों पर भरोसा नहीं करता। असली परीक्षा तब होती है, जब हालात बिगड़ते हैं। वास्तविक संकट, अस्थिरता और डर के समय कोई एसेट कैसा व्यवहार करता है, यही तय करता है कि वह सच में सुरक्षित निवेश है या नहीं। अगर मुश्किल समय में निवेशक किसी एसेट से दूर भागने लगें, तो उसका हार्ड एसेट होने का दावा अपने आप कमजोर पड़ने लगता है।

चाँदी की तेज़ी: केवल सट्टा नहीं, ठोस वजहें

चाँदी की हालिया तेज़ी को सिर्फ़ सट्टेबाज़ी कहना सही नहीं होगा। इसकी कीमतों में जो तेज़ उछाल देखने को मिला है, उसके पीछे कई मज़बूत और वास्तविक कारण मौजूद हैं। यह बढ़त अचानक नहीं आई, बल्कि धीरे-धीरे बन रही माँग और सीमित आपूर्ति का नतीजा है।

औद्योगिक माँग: चाँदी की असली ताक़त

आज की आधुनिक अर्थव्यवस्था में चाँदी केवल निवेश के लिए खरीदी जाने वाली धातु नहीं रह गई है। इसका इस्तेमाल रोज़मर्रा की कई ज़रूरी तकनीकों और उद्योगों में लगातार बढ़ रहा है। खास तौर पर:

·         सोलर पैनलों और फोटोवोल्टिक सेल में

·         इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग में

·         इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी तकनीक में

·         चिकित्सा और रासायनिक उत्पादों में

जैसे-जैसे हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे चाँदी की औद्योगिक माँग भी मज़बूती से आगे बढ़ रही है। यह माँग किसी अफ़वाह या बाजार के शोर पर आधारित नहीं होती, बल्कि फैक्ट्रियों, उत्पादन और वास्तविक खपत से जुड़ी होती है।

यहीं पर चाँदी और बिटकॉइन के बीच सबसे बड़ा अंतर सामने आता है। बिटकॉइन की कीमत मुख्य रूप से लोगों के भरोसे और निवेश भावना पर निर्भर करती है, जबकि चाँदी की कीमत को उसका वास्तविक और लगातार बढ़ता उपयोग भी सहारा देता है। इसी वजह से अनिश्चित समय में निवेशक चाँदी को ज़्यादा भरोसेमंद विकल्प मानने लगते हैं।

सीमित आपूर्ति और छोटे बाज़ार का असर

चाँदी का वैश्विक बाज़ार, सोने की तुलना में काफ़ी छोटा माना जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि जब भी चाँदी की माँग तेज़ी से बढ़ती है, तो उसकी कीमत पर असर भी बहुत जल्दी और ज़्यादा दिखाई देता है।

एक और अहम बात यह है कि चाँदी ज़्यादातर अलग से खनन नहीं की जाती बल्कि यह अक्सर:

·         Lead

·         Zinc

जैसी धातुओं के खनन के दौरान by-product के रूप में निकलती है। इसी वजह से चाँदी की आपूर्ति को अचानक बढ़ाना आसान नहीं होता, चाहे बाज़ार में उसकी माँग कितनी ही ज़्यादा क्यों हो।

जब भौतिक भंडार धीरे-धीरे कम होने लगते हैं और उसी समय निवेशकों तथा ईटीएफ के ज़रिये खरीदारी बढ़ जाती है, तो चाँदी की कीमतों में तेज़ उछाल देखने को मिलता है। छोटे बाज़ार और सीमित आपूर्ति की यही संरचना चाँदी को ऐसे मौकों पर तेज़ और कभी-कभी पराबोलिक तेज़ी की ओर धकेल देती है।

इसी कारण जब भी चाँदी के बाज़ार में भरोसा और माँग एक साथ बढ़ती है, तो उसकी कीमतें बहुत कम समय में काफ़ी ऊपर पहुँच सकती हैंजो बड़े और ज़्यादा स्थिर बाज़ारों में आमतौर पर देखने को नहीं मिलता।

अनिश्चित समय में सुरक्षित निवेश की तलाश

जब दुनिया की अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक अपने पैसों को सुरक्षित रखने के लिए उन संपत्तियों की ओर भागते हैं जिन पर उन्हें भरोसा हो। खासकर तब जब:

·         भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता हैजैसे देशों के बीच संघर्ष या राजनीतिक अस्थिरता

·         मुद्रास्फीति (Inflation) तेज़ होती हैजिससे रुपया, डॉलर जैसे नोटों की क्रय-शक्ति कम हो जाती है

·         मुद्रा बाज़ार (Currency markets) अस्थिर होते हैंजब डॉलर, रुपये या यूरो जैसी मुद्राओं में तेज़ उतार-चढ़ाव दिखता है

ऐसे माहौल में निवेशक आम तौर पर भौतिक और पारंपरिक संपत्तियों की तरफ रुख करते हैंजैसे सोना, चाँदी, रियल एस्टेट या अन्य हार्ड एसेट। इन संपत्तियों को लोग सुरक्षा कवच की तरह देखते हैं, क्योंकि भाव बड़ी गिरावट के समय भी अक्सर अपनी जगह बनाए रखते हैं या धीमी गिरावट दिखाते हैं।

पिछले समय में जब वैश्विक आर्थिक तनाव बढ़ा, तो बाज़ार ने विशेष रूप से चाँदी को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में स्वीकार किया। इसका मतलब यह है कि निवेशक सिर्फ सट्टा लगाने के लिए नहीं, बल्कि अपने पोर्टफोलियो को जोखिम से बचाने के लिए चाँदी खरीद रहे हैं।

चाँदी में यह बढ़ी हुई माँग तब और तेज़ होती है जब:

·         स्टॉक मार्केट में गिरावट होती है

·         मुद्रास्फीति बढ़ रही होती है

·         बैंकिंग या वित्तीय संकट के संकेत मिल रहे होते हैं

ऐसे समय में निवेशक पारंपरिकसेफ हेवन” (Safe Haven) संपत्तियों में पैसा डालते हैंऔर क्यूँकि चाँदी का बाज़ार छोटा और सप्लाई सीमित है, यह प्रवाह सीधे उसकी कीमत पर असर डालता है।

इसी वजह से जब भी वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, चाँदी में पूँजी का प्रवाह तेज़ हो जाता है, जिससे उसकी कीमतों में उछाल और भी शक्तिशाली बन जाता है।

बिटकॉइन पीछे क्यों रह गया?

इस पूरे माहौल में बिटकॉइन वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाया, जैसी निवेशकों को उससे उम्मीद थी। जब चाँदी की कीमतें तेज़ी से ऊपर जा रही थीं, तब बिटकॉइन एक ही दायरे में अटका रहा। इसी वजह से लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा कि क्या बिटकॉइन सच मेंहार्ड एसेटयाडिजिटल गोल्डकहलाने लायक है।

दरअसल, बिटकॉइन की कीमत कई ऐसे कारणों पर निर्भर करती है, जो मुश्किल और अनिश्चित समय में उसके लिए नुकसानदेह साबित होते हैं।

इसकी मुख्य वजहें क्या हैं?

निवेशकों का भरोसा और बाज़ार में पैसा
बिटकॉइन की कीमत काफी हद तक इस बात पर टिकी होती है कि बाज़ार में कितना पैसा घूम रहा है और निवेशकों का मनोबल कैसा है। जैसे ही डर या अनिश्चितता बढ़ती है, लोग सबसे पहले जोखिम वाले एसेट से पैसा निकालना शुरू कर देते हैं, और बिटकॉइन भी इसी श्रेणी में जाता है।

जोखिम से बचने की प्रवृत्ति
जब बाज़ार में तनाव होता है, तो निवेशक सुरक्षित विकल्पों की तलाश करते हैं। ऐसे समय में क्रिप्टो जैसी अस्थिर संपत्तियाँ लोगों को डराने लगती हैं। नतीजा यह होता है कि बिटकॉइन को सुरक्षित निवेश की जगह एक जोखिम भरे एसेट के तौर पर देखा जाता है।

बड़े निवेशकों की मुनाफ़ावसूली
हाल के समय में बड़े और संस्थागत निवेशकों ने बिटकॉइन में मुनाफ़ा निकालना शुरू किया। जब ऐसे बड़े खिलाड़ी पैसा बाहर निकालते हैं, तो कीमत पर दबाव पड़ना स्वाभाविक है। इससे बिटकॉइन की चाल और धीमी पड़ जाती है।

इन सभी वजहों के चलते बिटकॉइन उस वक्त मज़बूती नहीं दिखा पाया, जब बाज़ार को किसी ऐसे एसेट की ज़रूरत थी जो भरोसा और स्थिरता दे सके।

वहीं दूसरी तरफ, चाँदी की कीमत सिर्फ निवेशकों के मूड पर निर्भर नहीं करती। उसे उद्योगों से आने वाली माँग और सीमित भौतिक आपूर्ति का सहारा भी मिलता है। इसी कारण अनिश्चित समय में चाँदी ज़्यादा स्थिर और भरोसेमंद लगती है, जबकि बिटकॉइन में उतार-चढ़ाव बना रहता है।

बिटकॉइन बनाम चाँदी

पहलू

चाँदी (Silver)

बिटकॉइन (Bitcoin)

भौतिक रूप

हाँ, एक ठोस धातु जिसे देखा और छुआ जा सकता है

नहीं, पूरी तरह डिजिटल

वास्तविक उपयोग

बहुत ज़्यादा सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी, मेडिकल क्षेत्र

कोई औद्योगिक उपयोग नहीं

आपूर्ति की स्थिति

सीमित है और जल्दी बढ़ाई नहीं जा सकती

सीमित है, लेकिन खरीद-फरोख्त बहुत आसान

संकट के समय भूमिका

आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है

अभी भी जोखिम वाला एसेट माना जाता है

कीमत किस पर निर्भर

वास्तविक उपयोग + निवेशकों की माँग

निवेशकों की भावना + बाज़ार की तरलता


बाज़ार इस समय किस कहानी पर भरोसा कर रहा है?

मौजूदा हालात में बाज़ार का रुख काफ़ी साफ़ दिखाई दे रहा है। निवेशक अब उन संपत्तियों की तरफ ज़्यादा झुक रहे हैं, जिनमें सिर्फ़ उम्मीद नहीं बल्कि वास्तविक आधार मौजूद हो।

आज निवेशक ऐसी संपत्तियाँ तलाश रहे हैं:

·         जिनका असल और रोज़मर्रा का उपयोग हो

·         जिनके पीछे कोई ठोस या भौतिक आधार मौजूद हो

·         और जिनकी कीमत सिर्फ़ अफ़वाह, भावना या बाज़ार में घूम रहे पैसों पर निर्भर करती हो

इसी सोच के चलते चाँदी एक बार फिर भरोसेमंद हार्ड एसेट के रूप में उभरती हुई दिखाई दे रही है। उसका इस्तेमाल उद्योगों में भी होता है और साथ ही उसे सुरक्षित निवेश भी माना जाता है। दूसरी ओर, बिटकॉइन को फिलहाल ज़्यादा जोखिम वाला वित्तीय एसेट समझा जा रहा है, खासकर तब जब बाज़ार में अनिश्चितता और डर का माहौल हो।

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बिटकॉइन बेकार या अप्रासंगिक हो गया है। बल्कि सच्चाई यह है कि इस समय के बाज़ार माहौल में निवेशकों की पहली पसंद बदल गई है जैसे ही परिस्थितियाँ बदलेंगी, बाज़ार की कहानी भी बदल सकती है।

बिटकॉइन का भविष्य

यह मान लेना कि बिटकॉइन का खेल समाप्त हो गया है, जल्दबाज़ी होगी। यदि भविष्य में:

·  लंबे समय के निवेशक दोबारा खरीदारी शुरू करें

·  एक्सचेंजों पर बिक्री के लिए उपलब्ध बिटकॉइन की मात्रा कम हो जाए

·  बड़े और संस्थागत निवेशकों का भरोसा बना रहे

तो बिटकॉइन फिर से मज़बूती दिखा सकता है। बिटकॉइन की बुनियादी अवधारणा को विस्तार से समझने के लिए यह स्रोत उपयोगी है:https://www.investopedia.com/terms/b/bitcoin.asp

चाँदी की तेज़ी से क्या सीख मिलती है?

चाँदी की हालिया तेज़ी निवेशकों को एक साफ़ और अहम संदेश देती है। यह बताती है कि बाज़ार में सिर्फ़ उम्मीदों और कहानियों से काम नहीं चलता, बल्कि वास्तविक ज़रूरत और इस्तेमाल भी बहुत मायने रखते हैं।

इस तेज़ी से निवेशकों को ये बातें समझने को मिलती हैं:

·         किसी भी एसेट की असल माँग को कभी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता

·         भौतिक और ठोस संपत्तियाँ अनिश्चित और डर वाले समय में अक्सर बेहतर प्रदर्शन करती हैं

·         जिन बाज़ारों का आकार छोटा होता है, वहाँ मुनाफ़े के साथ जोखिम भी ज़्यादा होता है

सरल शब्दों में कहा जाए, तो चाँदी की यह चाल बताती है कि जब बाज़ार डगमगाता है, तब निवेशक उन्हीं संपत्तियों पर भरोसा करते हैं जिनका कोई वास्तविक आधार होता है।

बाज़ार का साफ़ संदेश: अभी भरोसा किस पर है?

चाँदी की कीमत इसलिए तेज़ी से बढ़ी क्योंकि बाज़ार उसे एक वास्तविक, काम आने वाली और भरोसेमंद संपत्ति मान रहा है। लोगों को लग रहा है कि मुश्किल और अनिश्चित समय में चाँदी जैसी भौतिक संपत्ति ज़्यादा सुरक्षा दे सकती है।

वहीं दूसरी ओर, बिटकॉइन की कीमत इसलिए ठहरी रही क्योंकि बाज़ार उसे अभी भी निवेशकों की भावना और बाज़ार में घूम रहे पैसों से जुड़ा हुआ एसेट समझ रहा है। डर और अनिश्चितता के माहौल में लोग ऐसे एसेट से दूरी बना लेते हैं, जिनमें उतार-चढ़ाव ज़्यादा होता है।

यह ज़रूरी नहीं कि यह सोच हमेशा के लिए बनी रहे। बाज़ार का यह फ़ैसला स्थायी नहीं, बल्कि मौजूदा हालात की सच्चाई है। जो निवेशक इस बदलाव को समय रहते समझते हैं और जल्दबाज़ी की जगह सोच-समझकर रणनीति बनाते हैं, वही लंबे समय में टिक पाते हैं और सही मौकों का फायदा उठा सकते हैं।

जो लोग क्रिप्टो को गहराई से समझना चाहते हैंकि इसमें पैसा कैसे आता-जाता है और जोखिम कहाँ छुपे होते हैंउनके लिए यह संसाधन काफ़ी उपयोगी है।

👉https://cointelegraph.com/explained/what-is-cryptocurrency-a-beginners-guide

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने