ईरान में चल रहा खूनी Conflict: वजह, मौतें, सरकार की स्थिति और दुनिया की प्रतिक्रिया

 ईरान में पिछले कुछ महीनों से जो कुछ हो रहा है, वह साधारण विरोध या प्रदर्शन से कहीं आगे जा चुका है। यह संघर्ष अब एक गहरे systemic collision की शक्ल ले चुका है — एक तरफ़ सत्ता, सेना और धार्मिक संस्थाएँ और दूसरी तरफ़ विशाल युवा आबादी, आर्थिक दबाव और एक आधुनिक समाज की आकांक्षाएँ। इस पूरे संघर्ष में सिर्फ़ सड़कें या सरकार ही नहीं, बल्कि economy, geopolitics, information control, religion, diplomacy और regional balance तक शामिल हो गए हैं।

ईरान का यह दौर सिर्फ़ एक आंतरिक कथा नहीं, बल्कि व्यापक West Asia geopolitics और global power dynamics का भी हिस्सा बन चुका है। इसी वजह से इसे दुनिया भर में तनाव, चिंता और strategic interest से देखा जा रहा है।

संघर्ष की जड़: यह संकट शुरू कैसे हुआ?

इस संघर्ष की शुरुआत की टाइमलाइन को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह अचानक नहीं आया। इसके तीन बड़े कारण हैं:

(A) आर्थिक गिरावट (Economic Breakdown)

ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से sanctions, व्यापार प्रतिबंधों और राजनीतिक अलगाव का बोझ झेल रही है। इसके परिणामस्वरूप:

·         तेल बिक्री में गिरावट

·         hyper-inflation

·         बेरोज़गारी

·         दवाइयों और essentials की कमी

·         local currency (Rial) का डूबना

महँगाई इतनी तेज़ बढ़ी कि meat, fuel, medicines और household items कई परिवारों की पहुंच से बाहर हो गए। यह आर्थिक तनाव सीधे समाज के सबसे कमजोर तबकों पर गिरा और धीरे-धीरे middle-class तक फैल गया। इसने social anger को जन्म दिया।

(B) राजनीतिक ढांचे का सवाल (System vs Youth)

ईरान का political structure एक theocratic republic है, जिसमें अंतिम निर्णय धार्मिक leadership के हाथ में होता है। दूसरी तरफ़ देश की 60% से अधिक आबादी 35 साल से कम उम्र की हैवो डिजिटल, ग्लोबल और ज्यादा स्वतंत्र जीवन की चाह रखने वाली पीढ़ी है।

इस जनरेशन के सवाल अब सिर्फ़ आर्थिक नहीं, बल्कि:

·         accountability

·         corruption

·         personal freedom

·         women’s rights

·         state control

पर केंद्रित हो गए हैं।

(C) December 2025 – January 2026: Trigger Phase

28 दिसंबर 2025 के बाद महँगाई और बेरोज़गारी के खिलाफ़ शुरू हुए प्रदर्शन जल्द ही anti-government narrative में बदल गए। नारों में:

·         “change the system”

·         “regime change”

·         “freedom”

जैसे शब्द खुलकर आने लगे। सरकार ने इन्हें तुरंत विदेशी साजिश का नाम देकर crackdown शुरू किया। इसी से संघर्ष का तेज़ दौर शुरू हुआ।


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