₹450/Quintal की मांग – पंजाब के गन्ना किसानों की नई उम्मीद

 पंजाब की राजनीति और खेती, दोनों में एक बार फिर गन्ने की गूंज सुनाई दे रही है।

वरिष्ठ नेता Partap Singh Bajwa ने हाल ही में राज्य सरकार से मांग की है कि गन्ने का MSP यानी State Advised Price ₹450 प्रति क्विंटल किया जाए।
यह मांग किसानों के बीच उम्मीद जगा रही है, खासकर उस दौर में जब खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।

किसानों की हालत और बढ़ती लागत

गन्ना किसानों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में उनकी लागत कई गुना बढ़ गई है।
डीजल, खाद, मजदूरी, और सिंचाई की लागत पहले से ज्यादा हो चुकी है।
ऐसे में ₹401 प्रति क्विंटल का पुराना रेट अब उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

कई किसान अब कह रहे हैं कि अगर कीमत नहीं बढ़ी तो गन्ने की खेती से मुंह मोड़ना पड़ेगा।
हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पहले ही रेट ₹415–₹425 तक पहुंच चुका है,
तो पंजाब के किसानों के मन में सवाल उठ रहा है — “हमारे साथ ही पिछड़ापन क्यों?”

किसानों की मांग और सरकार की चुनौती

Partap Singh Bajwa ने साफ कहा है कि यह सिर्फ कीमत बढ़ाने का सवाल नहीं, बल्कि किसान के अस्तित्व का मामला है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि जल्द फैसला लिया जाए ताकि गन्ना सीज़न शुरू होने से पहले किसानों को स्पष्टता मिल सके।

दूसरी ओर, सरकार के सामने भी दिक्कतें हैं।
शुगर मिलें पहले ही भुगतान में देरी करती हैं, और यदि दर ₹450 तक बढ़ाई गई, तो उन पर आर्थिक दबाव और बढ़ जाएगा।
सरकार को यह भी तय करना होगा कि किसानों को 30 दिनों के भीतर भुगतान मिले — वरना वही पुराना चक्र दोहराया जाएगा।

गन्ने की मौजूदा स्थिति (तालिका)

राज्यगन्ना MSP (₹/क्विंटल)
पंजाब₹401
हरियाणा₹415
उत्तर प्रदेश₹425

इस तुलना से साफ है कि पंजाब अब रेट के मामले में पिछड़ चुका है।
इसीलिए Bajwa की यह मांग किसानों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

किसानों की प्रतिक्रिया

गांवों में किसानों की जुबान पर एक ही बात है — “₹450 नहीं तो खेती नहीं।”
किसानों का कहना है कि जब हरियाणा जैसे छोटे राज्य अपने किसानों को बेहतर दर दे सकते हैं, तो पंजाब सरकार को भी ऐसा ही करना चाहिए।
कुछ किसानों ने तो यहां तक कहा कि अगर यह मांग नहीं मानी गई, तो वे मिलों की सप्लाई रोक देंगे।

कई किसान संगठनों ने भी सरकार को चेतावनी दी है कि जल्द रेट तय नहीं हुआ तो आंदोलन तय है।
गन्ना पंजाब की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान रखता है, इसलिए यह विवाद सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगा।

👉 किसानों की पुरानी मांगों और MSP रुझानों को देखने के लिए यह विश्लेषण देखें:https://agri.punjab.gov.in

मिलों की राय और उद्योग की स्थिति

शुगर मिल मालिकों का कहना है कि उत्पादन लागत, बिजली और लेबर चार्ज बढ़ चुके हैं।
अगर सरकार रेट बढ़ाएगी तो उन्हें भी राज्य से किसी प्रकार की राहत चाहिए होगी।
कई मिलें पहले से घाटे में चल रही हैं और उन्हें बैंक लोन पर निर्भर रहना पड़ता है।

इसलिए उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को एक संतुलित नीति बनानी चाहिए, जिसमें

  • किसान को उचित मूल्य मिले,

  • मिलों पर दबाव न पड़े,

  • और उपभोक्ताओं पर बोझ न बढ़े

राजनीतिक पहलू भी अहम

इस मुद्दे का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहेगा।
आने वाले विधानसभा चुनावों में यह किसानों के वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है।
Partap Singh Bajwa ने इस विषय को उठाकर सीधे ग्रामीण मतदाताओं के दिल को छू लिया है।

अगर सरकार ने देरी की, तो यह विपक्ष के लिए एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है।
वहीं अगर रेट बढ़ा दिया गया, तो किसान वर्ग में सरकार की साख मजबूत हो सकती है।

संभावित समाधान

कई कृषि विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि पंजाब को अब गन्ना नीति में सुधार करना चाहिए।
कुछ जरूरी कदम जो सरकार को उठाने चाहिए:

  1. MSP की वार्षिक समीक्षा:
    महंगाई और लागत को ध्यान में रखकर हर साल नई दर तय की जाए।

  2. भुगतान की निगरानी:
    गन्ना मिलों से सख्ती से 30 दिन में भुगतान की गारंटी ली जाए।

  3. किसानों के लिए सब्सिडी:
    ड्रिप इरिगेशन और नई किस्मों पर सहायता दी जाए ताकि उत्पादन लागत घटे।

  4. गन्ना विविधीकरण योजना:
    किसानों को अन्य फसलों के लिए प्रोत्साहन मिले ताकि जोखिम कम हो।

👉 इससे जुड़ी कृषि नीतियों और किसानों की राय के लिए यह लेख देखें:https://agricoop.nic.in

आगे क्या होगा?

फिलहाल सरकार ने Bajwa की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
लेकिन कृषि विभाग के सूत्रों के मुताबिक इस पर चर्चा शुरू हो चुकी है।
संभावना है कि आने वाले हफ्तों में मुख्यमंत्री इस पर कोई घोषणा कर सकते हैं।

अगर दर ₹450 तक पहुंचती है, तो पंजाब के गन्ना किसानों को राहत मिलेगी,
और शायद लंबे समय से रुके हुए भुगतान भी जल्द साफ हो जाएं।

अब नज़रें पंजाब सरकार पर हैं — क्या वह किसानों की उम्मीदों पर खरी उतरेगी ?

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